नई दिल्ली। प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने भारत की उन्नत जैव प्रौद्योगिकी और सेल थेरेपी प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए हेलिक्स सेल थेरेप्यूटिक्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। यह परियोजना मल्टीपल मायलोमा जैसी गंभीर रक्त कैंसर बीमारी के इलाज के लिए उन्नत दोहरे लक्ष्यीकरण वाली सीएआर-टी सेल थेरेपी विकसित करने पर केंद्रित है।
यह परियोजना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत भारत-सिंगापुर सहयोगात्मक ढांचे में सिंगापुर की कंपनी बायोसेल इनोवेशन्स के साथ साझेदारी में लागू की जाएगी।
मल्टीपल मायलोमा एक गंभीर और वर्तमान में लाइलाज रक्त कैंसर माना जाता है। मौजूदा सीएआर-टी थेरेपी में बीसीएमए को लक्षित कर मरीजों के उपचार में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। नई परियोजना का उद्देश्य बीसीएमए और सीडी19 दोनों मार्करों को एक साथ लक्षित कर उपचार की प्रभावशीलता और रोगमुक्ति की अवधि को बेहतर बनाना है।
परियोजना के तहत हेलिक्स सेल थेरेप्यूटिक्स प्रथम चरण के नैदानिक परीक्षण के माध्यम से अगली पीढ़ी की दोहरे लक्ष्यीकरण वाली सीएआर-टी कोशिकाओं का विकास, निर्माण और मूल्यांकन करेगी। यह थेरेपी विशेष रूप से उन मरीजों के लिए विकसित की जा रही है, जिन्होंने पहले कई उपचार कराए हैं और जिनके पास सीमित चिकित्सीय विकल्प बचे हैं।
सीएआर-टी सेल थेरेपी में मरीज की अपनी टी-लिम्फोसाइट कोशिकाओं को आनुवंशिक रूप से संशोधित किया जाता है, ताकि वे कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें नष्ट कर सकें।
विशेषज्ञों के अनुसार, दोहरे लक्ष्यीकरण की यह नई रणनीति पारंपरिक एकल-मार्कर सीएआर-टी थेरेपी की तुलना में बड़ी प्रगति मानी जा रही है। इससे जटिल मल्टीपल मायलोमा मरीजों में दीर्घकालिक रोगमुक्ति के बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है।
यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत उन्नत जैविक उत्पादों, सटीक चिकित्सा और आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों में भारत की स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही यह भारत और सिंगापुर के बीच जैव-चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग को भी मजबूत करेगी।
टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि उन्नत सेल और जीन थेरेपी भविष्य की सटीक स्वास्थ्य सेवाओं का आधार हैं और जटिल तथा पहले असाध्य रोगों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत-सिंगापुर सहयोगात्मक परियोजना के माध्यम से टीडीबी ऐसे स्वदेशी इम्यूनोथेरेपी प्लेटफॉर्म को समर्थन दे रहा है, जो अगली पीढ़ी की जैव प्रौद्योगिकी और किफायती स्वास्थ्य समाधान के क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।
हेलिक्स सेल थेरेप्यूटिक्स के प्रतिनिधि ने टीडीबी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह समर्थन कंपनी की अभिनव सीएआर-टी थेरेपी तकनीक के नैदानिक विकास और व्यावसायीकरण में तेजी लाएगा। साथ ही देश में उन्नत कैंसर उपचार तक पहुंच बढ़ाने में भी मदद करेगा।