कृषि जैव विविधता संरक्षण को नई मजबूती, डॉ. पी.एल. गौतम बने विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष

नई दिल्ली। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने कृषि जैव विविधता के संरक्षण, सतत उपयोग तथा पहुंच एवं लाभ-साझाकरण (एबीएस) से जुड़े मामलों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए जैविक विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 13(1) के तहत कृषि जैव विविधता विशेषज्ञ समिति का एक वर्ष के लिए पुनर्गठन किया है।
समिति के पुनर्गठन के साथ प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. पी.एल. गौतम को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। डॉ. गौतम राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और पादप किस्मों के संरक्षण एवं किसान अधिकार प्राधिकरण (पीपीवीएफआरए) के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। कृषि विज्ञान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें हाल ही में पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है। पीपीवीएफआरए के अध्यक्ष समिति के सह-अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे।
कृषि जैव विविधता विशेषज्ञ समिति वर्ष 2005 से एनबीए की एक महत्वपूर्ण सलाहकार संस्था रही है। कृषि आनुवंशिक संसाधनों से जुड़े उभरते मुद्दों के समाधान के लिए समय-समय पर इसका पुनर्गठन किया जाता रहा है। वर्षों के दौरान इस समिति का नेतृत्व देश के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किया है।
समिति ने कृषि जैव विविधता से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ अनुशंसाएं देकर जैव विविधता अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसमें खाद्य और कृषि के लिए पादप आनुवंशिक संसाधनों पर अंतरराष्ट्रीय संधि (आईटीपीजीआरएफए), फसल बीजों और पशु भ्रूणों के निर्यात से जुड़े पहुंच एवं लाभ-साझाकरण मुद्दे, पारंपरिक पादप प्रजनन गतिविधियों से संबंधित स्पष्टीकरण तथा सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजनाओं के लिए अनुमोदन प्रक्रियाओं जैसे विषय शामिल रहे हैं।
पुनर्गठित समिति में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय पादप, पशु एवं मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन, एनएएलएसएआर विधि विश्वविद्यालय और अन्य प्रमुख अनुसंधान एवं शैक्षणिक संस्थानों के वरिष्ठ विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं।
समिति जैव विविधता अधिनियम के तहत बीज क्षेत्र से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करेगी। इसके अलावा जैविक संसाधनों से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक अनुसंधान के दिशा-निर्देशों का परीक्षण करेगी तथा संकटग्रस्त देशी फसल किस्मों और पशुधन नस्लों के संरक्षण एवं सतत उपयोग के लिए सुझाव देगी। समिति कृषि जैव विविधता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों में भारत की भागीदारी को मजबूत करने के लिए तकनीकी और नीतिगत परामर्श भी प्रदान करेगी।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का मानना है कि समिति का पुनर्गठन कृषि जैव विविधता संरक्षण, आनुवंशिक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा तथा जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह समिति भारत के अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्ययोजना (एनबीएसएपी) के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहयोग करेगी और सतत विकास लक्ष्यों एसडीजी-2 (शून्य भूख), एसडीजी-13 (जलवायु कार्रवाई) तथा एसडीजी-15 (भूमि पर जीवन) को आगे बढ़ाने में योगदान देगी।