देश के 23 राज्यों, 195 जिलों और 64 शहरों ने हीट एक्शन प्लान तैयार किए

नई दिल्ली। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने 2019 में ‘हीट वेव की रोकथाम और प्रबंधन के लिए कार्य योजना तैयार करने हेतु राष्ट्रीय दिशा-निर्देश’ तैयार किए हैं। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार, शहरों को अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव में योगदान देने वाले प्रमुख कारकों की पहचान करने के लिए संवेदनशीलता का आकलन करना चाहिए और अपनी हीट एक्शन प्लान (एचएपी) में उचित शमन उपायों को शामिल करना चाहिए। अब तक 23 राज्यों, 195 जिलों और 64 शहरों द्वारा हीट एक्शन प्लान (एचएपी) तैयार किए जा चुके हैं।
वहीं, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने “भारतीय शहरों में लू के दौरान अनौपचारिक श्रमिकों की सुरक्षा” पर एक एडवाइजरी जारी की है। यह परामर्श स्वास्थ्य, सुरक्षा और लैंगिक-संवेदनशील अनुकूलन से संबंधित उपायों को रेखांकित करता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छायादार वेंडिंग ज़ोन, पेयजल सुविधाओं, कूलिंग सेंटर, काम के लचीले घंटे और गर्मी से संबंधित चेतावनियों के समय पर प्रसार जैसे उपायों के माध्यम से स्ट्रीट वेंडर्स और अन्य बाहरी श्रमिकों की आवश्यकताओं को हीट एक्शन प्लान में शामिल करने की सिफारिश की गई है।
दिल्ली एनसीटी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जलवायु परिवर्तन पर दिल्ली राज्य कार्य योजना (एसएपीसीसी 2.0) के संशोधन के तहत आईएमडी के आंकड़ों (1991-2020) और जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आपीसीसी) की एआर6 जलवायु परिदृश्यों का उपयोग करके एक व्यापक जलवायु संवेदनशीलता मूल्यांकन किया गया है। इस मूल्यांकन में बढ़ते तापमान और भीषण हीट वेव्स को दिल्ली के दो प्रमुख जलवायु संवेदनशीलता हॉटस्पॉट में से एक के रूप में पहचाना गया है।
इस अध्ययन के अनुसार, सदी के मध्य तक एसएसपी (सामाजिक-आर्थिक पथ) 2-4.5 के तहत ग्रीष्मकालीन अधिकतम तापमान में लगभग 1.5°C और एसएसपी 5-8.5 के तहत 2.1°C तक की वृद्धि का अनुमान जताया गया है, साथ ही अत्यधिक गर्म दिनों की आवृत्ति में भी वृद्धि होगी। दक्षिण दिल्ली को सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील जिला माना गया है, जबकि नई दिल्ली सबसे कम जलवायु-संवेदनशील जिला है।
यह मूल्यांकन अर्बन हीट स्ट्रेस को जनस्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और आजीविका के लिए एक बड़े जोखिम के रूप में रेखांकित करता है। संशोधित दिल्ली एसएपीसीसी में अर्बन हीट आइलैंड (यूएचआई) के प्रभावों को कम करने और शहरी जलवायु अनुकूलनशीलता में सुधार के लिए कई उपायों को शामिल किया गया है। इसमें भवनों में कूल रूफ लगाना, कूलिंग कॉरिडोर का विकास और शहरी हरित बुनियादी ढांचे का विस्तार, शहरी नियोजन एवं अवसंरचना विकास में यूएचआई प्रबंधन का एकीकरण, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के पर्यावरण-अनुकूल पुनर्विकास को बढ़ावा देना, और जलवायु अनुकूलनशीलता में सुधार के लिए वर्षा जल निकासी को मजबूत करना, वेटलैंड्स व शहरी जल निकायों का पुनरुद्धार तथा बाढ़-रोधी बुनियादी ढांचा शामिल है।
इसके अलावा, इसमें दिल्ली हीट एक्शन प्लान के कार्यान्वयन के माध्यम से शहर स्तर पर ऊष्मा सहनशीलता को मजबूत करने की परिकल्पना की गई है, जिसमें प्रारंभिक ऊष्मा चेतावनी प्रणाली, संवेदनशीलता का आकलन और मैपिंग, जन जागरूकता, क्षमता निर्माण, संवेदनशील समूहों की सुरक्षा, कूल रूफ को बढ़ावा देना, शहरी हरित क्षेत्र और अन्य जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचा, तथा मजबूत ऊष्मा-स्वास्थ्य निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली शामिल हैं।
वहीं, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंत्रालय द्वारा जारी ‘इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान’ (आईसीएपी) पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक लाभ सुरक्षित करते हुए सभी के लिए टिकाऊ कूलिंग और थर्मल आराम प्रदान करने के व्यापक लक्ष्य के साथ विभिन्न क्षेत्रों में टिकाऊ कूलिंग का एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करता है। इस योजना का उद्देश्य कूलिंग की मांग को कम करना, ऊर्जा दक्षता में सुधार करना और बेहतर तकनीकी विकल्पों को बढ़ावा देना है जो जलवायु अनुकूलनशीलता को बढ़ाने में योगदान देते हैं।
एमओएचयूए ने सघन और हरित शहरी विकास, हरित बुनियादी ढांचे तथा जलवायु-अनुकूल शहरी नियोजन को बढ़ावा देने के लिए राज्यों और शहरों को विभिन्न परामर्श और दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
शहरी एवं क्षेत्रीय विकास योजना निर्माण और कार्यान्वयन दिशा-निर्देशों में हरित-शहर नियोजन के घटकों और सूक्ष्म-जलवायु-अनुकूल उपायों का प्रावधान है, जिनमें सड़कों और इमारतों का अभिविन्यास, जल निकायों का निर्माण व संरक्षण, खुले क्षेत्रों और वनस्पतियों की व्यवस्था, सेमी-प्रीवियस ग्राउंड कवर, हरित भवन, सौर-अनुकूल डिजाइन और ग्रीन रूफ को बढ़ावा देना शामिल है।
वहीं, शहरों की गर्मी को कम करने के लिए विभिन्न योजनागत उपाय अमृत और अमृत 2.0 के तहत किए गए हैं। 18,168 एकड़ में फैली 4,171 पार्क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 11,119 एकड़ को कवर करने वाले 3,458 पार्क विकसित किए जा चुके हैं।
इसके अलावा, लगभग 1.21 लाख एकड़ में फैली 2,960 वाटरबॉडी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 18,535 एकड़ को कवर करने वाली 1,104 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। साथ ही, 346 ग्रीन मोबिलिटी परियोजनाएं (473 किमी पैदल मार्ग/वॉकवे/साइक्लिंग ट्रैक) पूरी हो चुकी हैं और 99 लाख एलईडी स्ट्रीटलाइट्स लगाई गई हैं, जिससे सालाना 665 करोड़ केडब्लूएच बिजली की बचत और 46 लाख टन सीओटू उत्सर्जन में कमी आई है।
इसके अतिरिक्त, अमृत मित्र “वुमन फॉर ट्रीज़” पहल के तहत 2025-26 में 7.65 लाख पौधे लगाए गए हैं। ये उपाय शहरी हरित क्षेत्र को बढ़ाने, स्थानीय सूक्ष्म जलवायु में सुधार करने और गर्मी के प्रभाव को कम करने में योगदान देते हैं।
अमृत 2.0 के तहत, 12 शहरों—बेंगलुरु, भोपाल, देहरादून, गाजियाबाद, ग्वालियर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, जोधपुर, लुधियाना, नासिक, वडोदरा और विशाखापत्तनम—में शहरी ऊष्मा शमन के वैज्ञानिक आकलन के लिए “बिल्डिंग हीट रेजिलिएंट सिटीज: ए स्ट्रैटेजिक पायलट फॉर अर्बन इंडिया” नामक एक पायलट कार्यक्रम शुरू किया गया है।