रायपुर: फिल्म सिटी निर्माण स्थल पर चल रहे विरोध के बीच छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह परियोजना केवल अधोसंरचना विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक हरित विकास मॉडल पर आधारित है। बोर्ड द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि फिल्म सिटी निर्माण की प्राथमिकताओं में पर्यावरण संरक्षण, संतुलित वृक्षारोपण और क्षेत्रीय सौंदर्य संवर्धन को विशेष महत्व दिया गया है।
परियोजना के अंतर्गत जहां निर्माण कार्य प्रस्तावित है, केवल वहीं न्यूनतम आवश्यक संख्या में पेड़ों की कटाई की जा रही है। यह प्रक्रिया राज्य शासन के नियमानुसार और सभी प्रशासनिक स्वीकृतियों के पश्चात की जा रही है। संबंधित प्रावधानों के तहत सक्षम अधिकारियों को विधिवत सूचना देकर ही कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।
बड़े पैमाने पर होगा वृक्षारोपण और हरित सौंदर्यीकरण
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिल्म सिटी परिसर में बड़ी मात्रा में छोटे एवं बड़े पेड़ों का रोपण किया जाएगा। इसके साथ ही आकर्षक सजावटी पौधे, विभिन्न प्रजातियों के फूलदार पौधे और हरित पट्टियां विकसित की जाएंगी, जिससे क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन और अधिक सुदृढ़ होगा। परियोजना को ग्रीन कैंपस कॉन्सेप्ट के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जिसमें वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक जल निकासी, हरित खुले क्षेत्र और जैव विविधता संरक्षण जैसे उपाय भी शामिल रहेंगे।
राज्य को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल
प्रस्तावित चित्रोत्पला फिल्म सिटी पर्यटन और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में राज्य को नई पहचान दिलाने का माध्यम बनेगी। इससे छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिल्म शूटिंग के प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरेगा। परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। होटल, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं से जुड़े व्यवसायों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और राजस्व में वृद्धि होगी।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का भरोसा
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने आश्वस्त किया है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए ही परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। बोर्ड ने ग्रामीणों से संवाद और सहभागिता के माध्यम से आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता दोहराई है, ताकि यह परियोजना सभी के सहयोग से एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित हो सके। फिल्म सिटी केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक, आर्थिक और पर्यटन विकास की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है, जो हरित विकास और समावेशी प्रगति के सिद्धांतों पर आधारित है।